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Ranjit Hoskote | लेखक रंजीत होसकोटे ने ‘यहूदी विरोधी’ पत्र के कारण जर्मन कला महोत्सव की समिति से दिया इस्तीफा | Navabharat (नवभारत)

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लेखक रंजीत होसकोटे की फोटो (Photo – Instagram)

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मुंबई : मुंबई के लेखक रंजीत होसकोटे (Ranjit Hoskote) ने यहूदी और हिन्दू राष्ट्रवाद की तुलना करने वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए हुई आलोचना के बाद जर्मनी में होने जा रहे ‘डॉक्युमेंटा कला महोत्सव’ (German Arts Festival Committee) की तथ्यान्वेषी समिति से इस्तीफा दे दिया है। ‘डॉक्युमेंटा’ समकालीन कला जगत की सबसे बड़ी प्रदर्शनियों में से एक है। इसका आयोजन हर पांच साल में जर्मनी के कैसल में किया जाता है। डॉक्युमेंटा का 16वां संस्करण 2027 में आयोजित किया जाएगा।

होसकोटे का इस्तीफा नौ नवंबर को जर्मनी के एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख के बाद आया है। लेख में उन पर मुंबई में इजराइल के महावाणिज्य दूतावास द्वारा ‘‘यहूदीवाद और हिंदुत्व” पर सह-आयोजित एक कार्यक्रम के खिलाफ 2019 के ‘बीडीएस’ ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को लेकर ‘‘बीडीएस के प्रति सहानुभूति जताने और यहूदी-विरोधी” होने का आरोप लगाया गया। बीडीएस (बहिष्कार, विनिवेश, प्रतिबंध) आंदोलन का उद्देश्य फलस्तीनियों पर इजराइल के उत्पीड़न के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन समाप्त करना है।

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रंजीत होसकोटे ने इस्तीफा पत्र में कही ये बात 

‘डॉक्युमेंटा’ के प्रबंध निदेशक एंड्रियास हॉफमैन को लिखे अपने इस्तीफे में होसकोटे ने कहा, ‘‘ये पिछले कुछ दिन मेरे जीवन के सबसे कष्टदायक दिन रहे हैं। जर्मनी में मुझ पर यहूदी-विरोधी होने का आरोप लगाया गया है, एक ऐसा देश जिसे मैं प्यार और प्रशंसा की नजर से देखता हूं और जिसके सांस्कृतिक संस्थानों और बौद्धिक जीवन में मैंने एक लेखक, क्यूरेटर और सांस्कृतिक सिद्धांतवादी के रूप में कई दशकों तक योगदान दिया है।” होसकोटे ने कहा कि जिन लोगों को ‘‘मेरे जीवन और काम का कोई ज्ञान ही नहीं है, उन्होंने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर के आधार पर मुझे आंका, निंदा की और कलंकित किया।”

आलोचकों ने नहीं जाना रंजीत होसकोटे का नजरिया 

होसकोटे ने कहा, ‘‘मेरे बारे में कठोरता और भावनाओं के साथ लिखा गया लेकिन मेरे किसी भी आलोचक ने मुझसे मेरा नजरिया जानना जरूरी नहीं समझा और अपना निर्णय सुना दिया।” उन्होंने कहा, ‘‘आइए, अब उन तथाकथित सबूतों पर नजर डालते हैं जो मेरे खिलाफ पेश किये गये हैं- ये सबूत भारतीय सांस्कृतिक मंच द्वारा 26 अगस्त 2019 को वितरित एक ज्ञापन पर मेरे हस्ताक्षर से जुड़े हैं, जिसमें मुंबई में इजराइल के महावाणिज्य दूतावास द्वारा ‘‘राष्ट्रों के बारे में नेताओं के विचार: यहूदीवाद और हिंदुत्व” विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम का विरोध किया गया था।”

रंजीत होसकोटे ने इसलिए किया ज्ञापन पर हस्ताक्षर

उन्होंने कहा, ‘‘इस कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर हिंदुत्व के दिग्गत वी डी सावरकर के साथ, यहूदियों के लिए आंदोलन का संचालन करने वाले थियोडोर हर्जल की तस्वीर थी।” उन्होंने कहा, ‘‘इस ज्ञापन पर मैंने इसलिए हस्ताक्षर किया क्योंकि कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से हर्जल और सावरकर के बीच समानता दिखाई गई थी और इसका उद्देश्य यहूदीवाद और हिंदुत्व के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध के लिए बौद्धिक आदरभाव विकसित करना था।”

रंजीत होसकोटे को लगा बेहद व्यंग्यपूर्ण

होसकोटे ने अपने त्याग पत्र में कहा, ‘‘मुझे यह बेहद व्यंग्यपूर्ण लगा, क्योंकि सावरकर हिटलर के प्रशंसक माने जाते थे और नाजी विचारधारा तथा उनके तौर-तरीकों के प्रति खुल कर सहमति व्यक्त करते थे।” कवि और कला समीक्षक ने कहा, ‘‘मैंने अपना जीवन सत्तावादी ताकतों और भेदभावपूर्ण विचारधाराओं का विरोध करने के लिए समर्पित कर दिया है।” हॉफमैन ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘मैं इस कठिन समय में हमारे साथ खड़े रहने की इच्छा के लिए रंजीत होसकोटे को धन्यवाद करता हूं और मानता हूं कि इस्तीफा देने का उनका निर्णय तार्किक तथा सम्मानजनक है। हमें खुद को हर प्रकार के यहूदी-विरोध से दूर रखने की जरूरत है।” (एजेंसी)


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