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सिख दंगा मामला: हत्या के 12 आरोपियों को बरी करने के आदेश के खिलाफ एसएलपी दायर करने को मंजूरी

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दिल्ली के उपराज्यपाल ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में हत्या के आरोपी 12 लोगों को बरी करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने के लिए अभियोजन को अपनी मंजूरी दे दी है। राज निवास के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने सभी आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील खारिज करने के उच्च न्यायालय के नौ अगस्त के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर करने के गृह विभाग के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में हत्या के 12 आरोपियों को बरी करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने के लिए अभियोजन को अनुमति दे दी है।’’ पश्चिम दिल्ली के नांगलोई क्षेत्र में दंगे में आठ लोग मारे गए थे और एक अन्य घायल हो गया था।
अधिकारी ने बताया कि सक्सेना ने एसएलपी को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव से संबंधित फाइल का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि फाइल में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं किया और इसके बजाय, सरकार की अपील को केवल इसे दायर करने में अत्यधिक देरी के आधार पर खारिज कर दिया।

उच्चतम न्यायालय ने जनवरी में एक आदेश में 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित 186 मामलों के संबंध में आगे की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. एन. ढींगरा और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अभिषेक को शामिल करते हुए एक एसआईटी का गठन किया गया था। मामले में 12 आरोपियों में मैकाले राम, रमेश चंद्र शर्मा, बिशन दत्त शर्मा, देस राज गोयल, अनार सिंह, जगदीश प्रसाद शर्मा, महावीर सिंह, बालकिशन, धर्मपाल, ओम पाल चौहान, ज्ञान प्रकाश और वेद प्रकाश शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।



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