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Maratha Reservation | ‘महाराष्ट्र में PM मोदी की एक भी सभा नहीं होने देंगे’, मनोज जरांगे ने सरकार को दी चेतावनी | Navabharat (नवभारत)

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जालना. मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे (Manoj Jarange) से मंगलवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान जरांगे ने सरकार को बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगे पूरी नहीं की तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महाराष्ट्र में एक भी जनसभा नहीं होने देंगे।

‘सगे-संबंधियों’ को आरक्षण से संबंधित मसौदे (अधिसूचना) को कानून में बदलने के लिए विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे जरांगे का भूख हड़ताल का आज चौथा दिन है। अन्न-जल त्याग से जरांगे का स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। जिसके चलते सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से आज मुलाकात की और आपने आंदोलन वापस लेने की मांग की। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया।

15-16 फरवरी के बाद देखें मराठों की ताकत

मनोज जरांगे ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वह राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भी जनसभा नहीं होने देंगे। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार क्या सरकार चला रहे हैं? ये लोग दो दिन में विशेष सत्र बुलाने वाले थे, उसका क्या हुआ? अब आप मराठों की ताकत 15 और 16 फरवरी के बाद देखना।

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सरकार पर भटकाने का आरोप

बता दें कि मनोज जरांगे ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार पर मराठा आरक्षण के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और दावा किया कि सरकार मराठों के लिए अलग से आरक्षण देने पर विचार कर रही है। जरांगे ने मसौदा अधिसूचना के तत्काल कार्यान्वयन की अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि वह मराठों के लिए अलग कोटा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विशेष सत्र में कुनबी मराठाओं के “सगे-संबंधियों” पर मसौदा अधिसूचना को कानून में परिवर्तित करने पर केंद्रित किया जाना चाहिए और उन लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने चाहिए, जिनके दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका है। कुनबी समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण प्राप्त है।

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स्वास्थ्य जांच से किया इंकार

गौरतलब हो कि अंबड तालुका के आंतरवाली-सराटी गांव में अनशन पर बैठे जरांगे ने शनिवार से भोजन-पानी छोड़ रखा है। एक साल से भी कम समय में यह चौथी बार है जब वह मराठा समुदाय को ओबीसी में शामिल करने की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। इस वजह से पहले ही कमजोर हो चुके जरांगे का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है। लेकिन जरांगे ने डॉक्टरों को अपनी जांच करने की अनुमति नहीं दी। दूसरी तरफ दिन बीतने के साथ धरनास्थल पर जरांगे समर्थक मराठों की भीड़ एक बार फिर बढ़ने लगी है।


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