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‘कांग्रेस लीडरशिप के लिए अब नेहरू-गांधी परिवार से बाहर देखे’, बोलीं शर्मिष्ठा मुखर्जी

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Sharmistha Mukherjee on Congress: पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पार्टी को आत्मनिरीक्षण का सुझाव दिया है. उन्होंने कहा है कि समय आ गया है कि कांग्रेस, नेतृत्व के लिए गांधी-नेहरू परिवार से बाहर भी देखे.

 सोमवार (5 फरवरी) को 17वें जयपुर साहित्योत्सव के बाद उन्होंने ये बातें कही हैं. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पुरजोर शब्दों में कहा कि निश्चित रूप से अब समय आ गया है कि नेतृत्व के लिए कांग्रेस को दूसरे ऑप्शन तलाशने चाहिए.

लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या भले ही कम लेकिन..
शर्मिष्ठा ने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस की सीटों की संख्या भले ही कम हो गई है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में उसकी बहुत मजबूत उपस्थिति है, क्योंकि वह देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक में सरकार में है.

पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि पार्टी में लोकतंत्र की बहाली, सदस्यता अभियान, पार्टी के भीतर संगठनात्मक चुनाव और नीति निर्णय की प्रक्रिया में हर स्तर पर जमीनी कार्यकर्ताओं को शामिल करने की जरूरत है. शर्मिष्ठा ने कहा कि उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी अपनी डायरी में यही लिखा है.

क्या सही में कांग्रेस नेता पार्टी की विचारधारा को आगे ले जा रहे हैं?
दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकीं शर्मिष्ठा ने कहा, “ये कांग्रेस नेताओं को देखना है कि पार्टी को मजबूत करने के लिए कैसे काम करना है. कांग्रेस यह आत्मनिरीक्षण करे कि क्या वह सही मायने में पार्टी की विचारधारा को आगे ले जा रही है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ केवल यही नहीं है कि आप अपने नेता का गुणगान करें, और जिस क्षण पार्टी नेतृत्व की आलोचना करें, तो पूरा इको सिस्टम आपको कठघरे में खड़ा कर दे.”

‘आम चुनाव तक गठबंधन बचा रहेगा?’

I.N.D.I.Aगठबंधन में नेतृत्व के सवाल पर उन्होंने कहा, “उन्हें (गठबंधन में शामिल दलों को ) अपने मुद्दे सुलझाने की जरूरत है, जैसे सीट बंटवारे का मुद्दा आदि, लेकिन आम चुनाव तक क्या यह गठबंधन बचा रहेगा, मैं इसका जवाब नहीं दे सकती. जहां तक नेतृत्व का सवाल है, गठबंधन में बहुत से वरिष्ठ नेता हैं, उन्हें स्वयं सुलझाना चाहिए. ‌ 
कांग्रेस में लीडरशिप को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस नेताओं को तय करना है कि कौन नेता होगा लेकिन पार्टी समर्थक के रूप में मुझे हमेशा इसकी चिंता रहती है.

बता दें कि शर्मिष्ठा ने सितंबर 2021 में सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी. अपने पिता की लिखी डायरी पर उन्होंने किताब भी लिखी है, जिसमें राहुल गांधी को लेकर कई दावे किए गए हैं.

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